सीहोर। दरभंगा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माताजी को लेकर की गई कथित अपमानजनक टिप्पणी के विरोध में देशभर में भाजपा महिला मोर्चा द्वारा कांग्रेस नेता राहुल गांधी का पुतला दहन किया गया। इसी क्रम में सीहोर में भी कांग्रेस कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया।

सीहोर में भाजपा महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष ऋतु जैन के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन चल रहा था। इस दौरान कांग्रेस जिला प्रवक्ता पंकज शर्मा के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ता वहां पहुंचे और कथित तौर पर नारेबाज़ी शुरू कर दी। भाजपा की ओर से आरोप लगाया गया है कि इस दौरान महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं के साथ अभद्रता की गई और गाली-गलौज भी हुआ। स्थिति बिगड़ते ही दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं में हाथापाई हो गई।

इस झड़प में भाजपा युवा मोर्चा के नगर महामंत्री समीर सेन गंभीर रूप से घायल हो गए। उनका आरोप है कि कांग्रेस जिला प्रवक्ता पंकज शर्मा ने उन पर कील लगे डंडे से हमला किया, जिससे उनके कंधे और चेहरे पर चोटें आई हैं।

स्थानीय विधायक सुदेश राय मौके पर पहुंचे। घायल समीर सेन को लहूलुहान हालत में देखकर वे गुस्से में आ गए और कथित तौर पर अपशब्द कहे, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। विधायक के इस व्यवहार को लेकर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

घटना के बाद भाजपा जिला अध्यक्ष नरेश मेवाड़ा और नगर परिषद अध्यक्ष प्रिंस राठौर भी मौके पर पहुंचे और महिला कार्यकर्ताओं के साथ हुई अभद्रता की कड़ी निंदा की।

वहीं, कांग्रेस की ओर से प्रदेश सचिव हरपाल ठाकुर ने विधायक सुदेश राय की टिप्पणी पर आपत्ति जताई और भाजपा पर पलटवार किया, कहा यह दिन सीहोर के इतिहास का काला दिन था, भाजपाइयों द्वारा कांग्रेस कार्यालय को जलाने की धमकी दी, कांग्रेस कमजोर जरूर है पर इतनी भी कमजोर नही की अपने घर की रक्षा ना कर पाए, साथ ही उन्होंने कहा की भाजपा नेताओ को अकेले मे बैठकर चिंतन करना चाहिए की पुतला दहन की आड़ मे उन्होंने जो किया वह कितना सही है!!

इस घटना को लेकर समीर सेन ने पंकज शर्मा समेत कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है, वहीं कांग्रेस की ओर से भी समीर सेन पर कार्रवाई की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा गया है !
इस पूरे घटनाक्रम ने सीहोर की राजनीति को गर्मा दिया है। दोनों ही दल एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं, और अब मामला पुलिस और प्रशासन के पाले में है।
निष्कर्ष
जो भी हो, सीहोर में हुई यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सबको है, लेकिन हिंसा, अभद्रता और भाषा की मर्यादा लांघना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
