
इंदौर, मामला बाणगंगा थाने क्षेत्र का है जहां स्कीम नंबर 78 निवासी विशाल गुप्ता अपना एक बार मेरी मर्जी के नाम से संचालित करता है जिसने अपनी बार वाली जमीन का एक टुकड़ा लगभग 1500 स्क्वायर फीट जगह किराए पर एक युवा व्यवसाय आलोक सिंह को दी जो कि निपानिया का रहने वाला है l आलोक ने एक शिकायत बाणगंगा थाने मे की जिसमे उसने विशाल गुप्ता पर आरोप लगाते हुए बताया की आपसी सहमति से 11 महीने का किरायानामा अनुबंध शेखावत नोटरी शॉप पर हुआ , जिसका किराया आलोक द्वारा 50 हजार रुपए प्रतिमाह विशाल को देने का अनुबंध है वहा आलोक अपना पानी का प्लांट संचालित कर रहा था , बाद में आलोक ने 20 लाख रुपए विशाल गुप्ता से व्यापार बढ़ाने और अपनी पानी के प्लांट के लिए अतिरिक्त मशीन खरीदने के लिए लिया, जिसका ब्याज आलोक ₹50,000 प्रति माह विशाल को दे रहा था l

आलोक अपनी पत्नी श्वेता सिंह के साथ मिलकर पानी का व्यवसाय चला रहा था इसी बीच आलोक अपने पुराने मित्र राघव बरोलिया की शेयर मार्केट ब्रोकरेज कंपनी पर उससे मिलने गया तब उसे पता चला कि वहां पुलिस आई है और एक 10,000 के ट्रांजैक्शन के मामले में आलोक को भी आरोपी बनाकर जेल भेज दिया गया l आलोक की पत्नी श्वेता के अनुसार विशाल गुप्ता ने एक दिन श्वेता को कॉल कर नया अनुबंध बनाने को कहा और आलोक के साइन फर्जी तरीके से घूमने की बात कहकर जमीन के साथ-साथ मशीनों को भी अनुबंध में विशाल गुप्ता का मालिकाना हक बताकर नया अनुबंध बनवाने की बात कही और पुलिस के नाम से धमकाने लगा लेकिन श्वेता ने ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया !
एक दिन विशाल ने पुलिस के बहाने श्वेता से प्लांट की चाबी मंगवा और खुद का ताला वहां लगा दिया श्वेता के पूछने पर की ताला किस कारण बदला गया, विशाल ने कोई भी कारण न बताते हुए आलोक के भाई आशीष के साथ गाली गलौच करी एवं उनके लोडिंग भी कब्जे में ले लिया साथ ही श्वेता और आलोक को फसाने की धमकी देने लगा, जब आलोक जेल से आया, पूरे मामले की जानकारी लगते ही उसने बाढ़गंगा थाने मे विशाल गुप्ता पर एफ. आई. आर. करने बाबत आवेदन दिया , वह अपने प्लाट पर गया उस वक्त भी विशाल ने आलोक को फसाने की बात कही और उल्टा 20 दिन बाद आलोक के खिलाफ बाणगंगा थाने में झूठी एफआईआर दर्ज करवा दी पुलिस ने भी आलोक पर बिना उससे पूछताछ किये कार्रवाई कर दी
जब आलोक ने मौके पर बनाई वीडियो पुलिस को बताई तो पुलिस का ढीला रवैया हुआ और विशाल के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया गया l अपने प्लांट पर बुरी नीयत से प्लांट को हड़पने के विषय में विशाल गुप्ता पर कार्रवाई की मांग का आवेदन कमिश्नर कार्यालय से लेकर बाण गंगा थाना यानी कि पुलिस विभाग के हर कार्यालय में दे चुका था लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई

जब विशाल से पूछताछ हुई तो विशाल ने फर्जी दस्तावेज थाने में प्रस्तुत किया और मामले को घूमाने की कोशिश की आलोक के अनुसार नोटरी वकील ने भी अपने बयान गलत दर्ज करवाए, जिसका प्रमाण आलोक के पास है साथ ही प्लांट पर कब्जा करने के बाद और मशीनों को हड़पने के बाद विशाल ने लगभग 12 लाख रुपए की पानी की बोतलों को फर्जी तरीके से मार्केट में बेच दिया जिसका सबूत भी आलोक के पास मौजूद है विशाल द्वारा प्रस्तुत किये फर्जी कागजात का इस्तेमाल वह आलोक को अन्य प्रकरण में फसाने के लिए भी कर रहा है , दंपति पूरी तरह से हताश है जीविका का एकमात्र सहारा जिसको ब्याज पर रुपया लेकर चलाया जा रहा था अब उसे भी विशाल द्वारा हड़पा जा चुका है लेकिन पुलिस सब कुछ देखते हुए भी अंधी बनी हुई है जब अखबार ने मामले की इंचार्ज इस.आई. अंजना परमार से बात करने की कोशिश की तो अंजना ने भी इस बात को घुमाते हुए कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी बाद में हीरानगर एसीपी रुबीना मिजवानी ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए दोनों पक्षों को बुलाया लेकिन विशाल गुप्ता ने शहर से बाहर जाने का हवाला देते हुए एसीपी कार्यालय आने से मना कर दिया

हर्ष उजाला से हुई बात में एसीपी रुबीना ने बताया की बाणगंगा थाना इस मामले में जांच कर रहा है विशाल गुप्ता को नोटिस भेज कर जवाब भी मांगा है एवं जांच में सहयोग करने के लिए कहा है इस मामले को देखकर यही लग रहा है कि विशाल किसी भी तरह से पुलिस पर दबाव बना रहा है आखिर क्या कारण है कि पिछले 45 दिनों से पुलिस ने विशाल गुप्ता पर कोई कार्यवाही नहीं की ? अब देखना यह है कि क्या पीड़ित दंपत्ति को एसीपी कार्यालय से मदद मिलेगी या फिर आलोक का करोड़ों का व्यापार सिस्टम की भेट चढ़ जाएगा , देखना दिलचस्प होगा!!
